सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक INS विराट को तोड़ने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी
नई दिल्ली
लोगों की मांग है कि आईएनएस विराट को संग्राहलय में तब्दील कर दिया जाए, ताकी आने वाली पीढ़ी भारतीय नौसेना के गौरवशाली इतिहास को देख सके। बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और बुधवार को इसमें बड़ा फैसला आया। भारतीय नौसेना से रिटायर हो चुके विमानवाहक पोत आईएनएस विराट को तोड़ने की प्रक्रिया जारी थी, लेकिन देश में बहुत से लोग ऐसे हैं, जो इसके खिलाफ थे। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर विराट को बचाने के लिए अभियान भी चलाया। सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक INS विराट को तोड़ने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। INS विक्रमादित्य के आने के बाद विराट को चार साल पहले भारतीय नौसेना से रिटायर किया गया था। इसके बाद पिछले साल जुलाई में 38.54 करोड़ रुपये में श्री राम ग्रुप ने इसे खरीदा और गुजरात के भावनगर ले गए, जहां पर दिसंबर से इसको तोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
मौजूदा वक्त में 300 प्रशिक्षित श्रमिक इसको तोड़ने का काम कर रहे हैं। जिस वजह से इसका 30 प्रतिशत हिस्सा टूट भी गया है। INS विराट मजबूत स्टील से बना है और काफी हिस्सा पूरी तरह से बुलेटप्रुफ है। श्रीराम कंपनी इसे तोड़कर इसका स्टील निकालकर बेचेगी। INS विराट को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने राजनाथ सिंह को लिखा पत्र, की ये पेशकश वहीं इसके बिकने की प्रक्रिया का बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध किया। साथ ही वो सरकार से इसे संग्राहलय में तब्दील करने की मांग कर रहे थे। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका डाली गई। जिस पर बुधवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसके तोड़ने की प्रक्रिया पर स्टे लगा दिया।
साथ ही कहा कि जब तक अगला आदेश नहीं आ जाता तब तक यथास्थिति बनी रहे। गौरवशाली है इतिहास INS विराट का निर्माण जून 1944 में शुरू हुआ और 18 नवंबर 1959 को इसे रॉयल नेवी में कमीशंड किया गया। रॉयल नेवी से 1985 में डी-कमीशंड होने के बाद विराट ने 12 मई 1987 को इंडियन नेवी में कमीशन प्राप्त किया। इसके बाद आईएनएस विक्रमादित्य के आने तक ये हिंद महासागर में बादशाह की तरह रहा। इसे दुनिया का सबसे पुराना वॉरशिप कहा जाता है, जिसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल है।

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